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Ahmed Faraz Poetry in Hindi, Faraz Urdu Shayari, Love, Sad Ghazals

Ahmed Faraz Ghazals in Hindi बुझी नज़र तो करिश्मे भी रोज़ो शब के गये; कि अब तलक नही पलटे हैं लोग कब के गये; करेगा कौन तेरी बेवफ़ाइयों का गिला; यही है रस्मे ज़माना तो हम भी अब के गये; मगर किसी ने हमें हमसफ़र नही जाना; ये और बात कि हम साथ साथ सब […]